जिस नैया की झुंझुनुवाली खुद ही खेवनहारjis naiya ki jhunjhunuwali khud hi khewanhaar


जिस नैया की झुंझुनुवाली खुद ही खेवनहार
वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

तूफां में कश्ती चाहे हिचकोले खाये,
भंवर के थपेड़े चाहे जितना डराएं,
जग की खेवनहारा थामे खुद जिसकी पतवार,
वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

मांझी बनेगी जब ये मैया तुम्हारा ,
मझधार में भी तुमको मिलेगा किनारा,
जिसकी रक्षक बनकर बैठी मैया सिंह असवार,
वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

हर्ष तू जीवन नैया इसको थमा दे,
इसके भरोसे प्यारे मौज तू उड़ा ले,
हाथ पकड़ ले जब ये तेरा फिर किसकी दरकार,
वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो,

जिस नैया की झुंझुनुवाली खुद ही खेवनहार
वो नैया पार ही समझो , बिना पतवार ही समझो |

भजन गायिका - माधुरी मधुकर
संपर्क - 0918902154970

स्वर - माधुरी मधुकर

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