देवी तलाब भी दुनियाdevi talaab bhi duniya andar tirth hai maahmai da


देवी तलाब भी दुनिया अंदर तीर्थ है महा माई दा,
सिद्ध पीठ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल झुकाई दा,

लक्ष्मी काली वैष्णो माँ दा मंदिर दे विच वास है,
त्रिपुल मालिनी रूप सती दा पूरी करदा आस है,.
भगति दा वर लेके माँ तो जीवन सफल बनाई दा,
सिद्ध पीठ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल झुकाई दा,

सोने दा एह है मंदिर सोहना भगता रल बनवाया है,
तन मन नाल सेवा करके जो चाया सो पाया है,
आओ असि भी मदिर चलिये मौका नहीं गवाई दा,
सिद्ध पीठ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल झुकाई दा,

परिकर्मा विच शिव दियां भगता शिवलिंग कई सजाये ने,
शिव शक्ति दी महिमा देखन देवी देवते आये ने,
जिसनु मिल जाये ऐसा द्वारा ओहनू होर की चाहिदा,
सिद्ध पीठ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल झुकाई दा,

भगत प्यारे शुक्र वार नु माँ दी चोंकि करदे ने,
खीर दा भोग लगा के दर्शी वरुण हजारी भरदे ने,
माँ दी रजा विच रह के राजी माँ दा शुक्र मनाई दा,
सिद्ध पीठ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल झुकाई दा,

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