तेरो बिगड़ गयो नन्द लाल

तेरो बिगड़ गयो नन्द लाल कई यो रे यशोदा ने,
कंकर मार के मटकी फोड़े पकड के मोरी ऊँगली मरोड़े
डाले रे प्रेम का जाल कई यो रे यशोदा ने,

समजाने से बाज न आये हम ने माये वस्त्र चुराए,
बैठे रे पेड़ की डाल कई यो रे यशोदा ने,

हम क्या डांटे है बडो छोटो
काम करे पर से खोटो जाने है सारे ग्वालबाल
कई यो रे यशोदा ने,

सच बुजे तो श्याम के डर से
हम न निकले अपने घर से
पूछो न कमल सिंह जाल
कई यो रे यशोदा ने,

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