सावन की रुत हैsawan ki rut hai aaja maa


सावन की रुत है आजा माँ,
तेरा झूला प्यारा घलवाया,
फूल बेला, गुलाबबसंती माँ
रजनीगंधा से सजवाया, सावन की रुत है......

हो सूरज चंदा तारे, सेवा में दादी खड़े तेरे आगे,
हो बिंदिया काजल मेहंदी,
तेरे मन को ऐ दादी यहीं भाये,
लाल चुनरिया ओ दादी,
तेरी लाल चुनरिया ओ दादी,
हीरे मोती से जड़वाया,
सावन की रुत है..........

हो तीजां रो सिंधारा,
मनास्यां दादी थे चली आओ,
हो भगतां री ये विनती,
सुनलो ओ दादी थे चली आओ,
लाड करां म्हें ओ दादी,
थारा लाड करां म्हें ओ दादी
मनचायो सिणगार करवाया,
सावन की रुत है......

हो सावन मस्त महीना,
मेरी दादी बस इकबार ही आये,
हो झूला ना झुलायें,
मेरी दादी दिल की दिल में रह जाए,
रुत ये सुहानी ओ दादी,
है रुत ये सुहानी ओ दादी, भक्तों का मन है हर्षाया,
सावन की रुत है........

हो हम तो हैं केडवाले,
तेरी सेवा में दादी हैं लग जाऐं
होsतेरी शरण में दादी,
रहे मधु यहीं हरपल है चाहे,
जन्मों जनम तक ओ दादी,
फिर जन्मों जनम तक ओ दादी,
तेरी भक्ति के रंग में रंगजास्यां,
सावन की रुत है.....

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