मेरे श्यामा सबके सिरजनहार,
तेरे बिना अब कोई नही है जग का पालन हार....
जग की प्रीती अज़ब निराली, जाने जानन हार,
बिन मतलब ना मुख से बोले, मतलब की मनवार,
तेरे बिना अब कोई नही है जग का पालन हार....
सुख मे सब कोई संगी साथी, कुटुम्ब सखा परिवार,
भीड़ पड़े जब मुखङा मोड़े, स्वार्थ का संसार,
तेरे बिना अब कोई नही है जग का पालन हार....
ना जानू कोई भक्ती पूजा, मै हूँ मुरख गंवार,
जैसो तेसो हूँ मै स्वामी, मुझ पर दया विचार,
तेरे बिना अब कोई नही है जग का पालन हार....
तुम ही सागर तुम ही किनारा, तुम ही हो पतवार,
तुम ही नैया तुम ही खवैया, तुम हो खेवण हार,
तेरे बिना अब कोई नही है जग का पालन हार....
सुख ओर दुःख मे तुम ही सहारा, तुम ही प्राणाधार,
‘दास’ की बस यही भावना, सुखी रहे संसार,
तेरे बिना अब कोई नही है जग का पालन हार....