आज सजी हूँ दुल्हन सी मैं ,
कब तुम आओगे पिया।
अपने हाथों से पानी पिलाकर ,
कब गले से लगाओगे पिया।।
धुन :- फूल बंगले की शोभा है न्यारी
करवाचौथ का त्योहार आया,
घर घर में है आनद छाया।
कई सदियों पुराना यह त्योहार है।
पति पत्नी का इसमें छुपा प्यार है॥
बेला मधुर मिलन का है आया,
घर घर में है आनद छाया।
हर सुहागिन सुहाग मना रही है।
सज-धज के पिया को रिझा रही है॥
नई दुल्हन सा रूप बनाया,
घर घर में है आनद छाया।
अपनी प्रिया को प्रियतम बुला रहा है।
चाँद निकल आया ,बतला रहा है॥
दरस पिया का चाँद में पाया,
घर घर में है आनद छाया।
हर सुहागिन ‘‘मधुप’’ यह इबादत करे।
जोरी सदा सुहागिन - सलामत रहे॥
हर नारी ,नारी धर्म निभाया,
घर घर में है आनद छाया।