बाबा खाटू का तेरा दाल चूरमा मन लालचावे रे,


बाबा खाटू का तेरा दाल चूरमा मन लालचावे रे,
हार गए सारे हलवाई बना ना पावे रे,
बाबा खाटू का....

खाटू गाव का पानी तेरा गंगाजल सा काम करे,
दुर-दुर तक देशी घी की, खुशबू आवे रे,
बाबा खाटू का ......

सवामणी बनवा कर बाबा, तेरे भोग लगावे जी,
भगता साग मार सबदका, जी भर खावे जी,
बाबा खाटू का.......

बर्फी तेरा और कलाकंद सारे फीके पार हो गए जी,
दूध, मलाई, रबड़ी अब तो, याद ना आवे रे,
बाबा खाटू का .......

"बनवारी" कुछ ऐसा कर दे, बाराहो महीना खावे जी,
दाल-चूरमा खाखा कर के, भजन सुनावे जी,
बाबा खाटू का.........

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