ओ गुरुओ के गुरु गोरख मैं थारा हो लिया
- किसा पाड दिया यो चाला, माटी का बणाया गढ़वाला,
थारा देख्या खेल निराला हो, थारे मोह नै मोह लिया,
ओ गुरुओ के गुरु गोरख मैं थारा हो लिया
- गुरु भक्ति ख़ूब दिखाई, भिक्षा महै आँख लुटाई
तेरी गावै जगत बड़ाई, अगत का चारा बो लिया
ओ गुरुओ के गुरु गोरख मैं थारा हो लिया
- बाछल का भाग जगाया, उस गोगा पीर को ल्याया,
तेरे जैसा नाथ नही पाया, जगत मन्ने सारा टोह लिया
ओ गुरुओ के गुरु गोरख मैं थारा हो लिया
- पूरणमल तन्नै बचाया, माथे का कलंक मिटाया,
वो फेर भगत कहलाया, उका तन्नै दाग धो लिया
ओ गुरुओ के गुरु गोरख मैं थारा हो लिया
- मन महै भगती उपजाकै, मैनावंती को राह दिखाकै
गोपीचंद को अमर कराकै, रै तू चलता हो लिया
ओ गुरुओ के गुरु गोरख मैं थारा हो लिया
प्रेषक:
सिंगर सुनील धनुवंशी 98123-01662
हिसार हरियाणा - 125001