तर्ज : गमछा बिछाई के (भोजपुरी)
उठजा छलांग मार के, सागर को लांघ दे
लंका में राम नाम का, झंडा तू गाड़ दे
डंका तू गाड़ दे..
सूरज को निगलना तेरा, पर्वत ऊंछालना
फिर से.. जगा वो शक्तियां, सागर है लांघना
माता की खबर लाना है..
जा उड़जा दहाड़ के.. लंका में राम नाम का..
व्याकुल है तेरे रामजी, सीता की सुध बिना
हनुमत.. प्रभु श्री राम को, सीता से दे मिला
कहां खो गई वो शक्तियां..
जो बादल को फाड़ दे.. लंका में राम नाम का..
लंका में जा के रावण को, अच्छा सबक सिखा
ज्ञानी है, फिर भी भटक गया, सही रास्ता दिखा
उसकी अशोक वाटिका..
जाकर उखाड़ दे.. लंका में राम नाम का..
अब याद आई शक्तियां, तो गरजे हनुमानजी
हुंकार जोर की भरी, जय जय श्री राम की
अम्बरीष बोले आना तू..
सबको पछाड़ के.. लंका में राम नाम का..
लीरिक्स & सिंगर :
अम्बरीष कुमार, मुंबई
9327754497