मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,
बीते यू जीवन यह मेरा लाड़ली,
बस इतनी तमन्ना है बस इतना कहना है,
मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली
बीते यू जीवन बस मेरा लाडली ॥
जब भी मुख में खोलूं श्री राधे राधे बोलूं
प्रेम सुधा रस अमृत को घोलू
अमृत को पीना है मस्ती से जीना है
मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,
बीते यू जीवन यह मेरा लाडली ॥
राधे राधे राधे का सुमिरन चलेगा
आठों पहर इसका चिन्तन रहेगा
चाहे सुबह सवेरा हो, चाहे सांझ अंधेरा
हो मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,
बीते यू जीवन यह मेरा लाडली ॥
सुनते हैं राधे सहारा बनती हो,
डुबते हुए का किनारा बनती हो
भव पार मुझे करना
मेरे पापों को हरना
मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,
बीते यू जीवन यह मेरा लाडली॥
चाहें जो समझना ये मन तेरा हो गया
सुमिरन की मस्ती में मन मेरा खो गया
श्री सर्वेश्वर मण्डल,
करता विनती हर पल ,
मन में हो सुमिरन इक तेरा लाडली ,
बीते यू जीवन बस मेरा लाडली ॥
भजन भाव रचयिता
मोहन प्रकाश काबरा, किशनगढ़
श्री राधासर्वेश्वर संकीर्तन मंडल , किशनगढ़