ओ पापी मन करले भजन
ओ पापी मन, करले भजन ॥
बाद में प्यारे, पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥
ओ पापी मन, करले भजन ...
क्यों, करता है, मेरा मेरा ।
क्या, है तेरा, क्या है मेरा ॥
मुठी, बाँध के आया है, हाथ, पसारे जाएगा ।
जैसा, किया, कर्म तूने, वैसा, ही फल पाएगा ।
बाद में प्यारे, पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥
ओ पापी मन, करले भजन ...
भरी, जवानी, जी भर के सोया ।
आया, बुढ़ापा, जी भर के रोया ॥
प्रभु, की नजर से तूँ, बच नहीं पाएगा ।
आया, जो बुढ़ापा तो, थर थर कांपेगा ।
बाद में प्यारे, पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥
ओ पापी मन, करले भजन ...
पाया, मनुष्य तन, फिर क्यों, तूँ रोया ।
मोह, माया के, मद में, तूँ खोया ॥
सुंदर, जीवन, पाया है तो, प्रभु के गुण, गाए जा ।
अपने, जीवन, को प्यारे, भक्ति में लगाए जा ।
बाद में प्यारे, पछताएगा जब,
पिंजरे से पंछी, निकल जाएगा जब,
पिंजरे से पंछी निकल जाएगा ॥
ओ पापी मन, करले भजन ...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल