टेढ़ी चितवन टेढ़ी चालनिराली
राधा रमण तोपे जाऊँबलिहारी
तिरछी चितवन रूप सलोना
ना जाने क्या कर गया टोना
जबसे तेरी छवि निहारी
राधा रमण तोपे …..
अधर पै मुरली मन को लुभाये
जो भी देखे सुध बिसराये
लीला दिखाए नित न्यारी न्यारी
राधा रमण तोपे …..
एक नज़र कृपा की करदो
निज सेवा का हमको वर दो
इतनी सी है अरज हमारी
राधा रमण तोपे …..