चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,
कैसी छाई हरियाली आज कुजंन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....
शीतल मन्द सुगंध युत,चल रही त्रिविध समीर
तुम हूँ पधारो रास में,हरिये जन मन पीर
प्रेम बांवरे बने री तेरे दर्शंन में,चलो
चलो री किशोरी वृन्दावन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,
कैसी छाई हरियाली आज कुंजन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....
चमक चन्द्रं की चांदनी,मौं मन रही लुभाये
मत देखो या चन्द्र को,कहीं दे ना दीठ लगाये
आज दियो ना दिठौना गौरे आनंन में,
चलो चलो री वृन्दावन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,
कैसी छाई हरियाली आज कुजंन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....
शुक-पिक-खजंन द्रुमंन चढ़ी,चहक रहे हरषाये
मन हूँ रास रस निरखै वै,प्रेमी रहे दुराये
प्रेम बांवरे बनेंगे तेरे दर्शन में,
चलो चलो किशोरी वृन्दावन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में,
कैसी छाई हरियाली आज कुजंन में
चलो चलो री किशोरी वृन्दावन में....
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000