मेरी रूठ गई कालका मनाऊँ कैसे
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ कैसे ॥
मनाऊँ कैसे, मैं रिझाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
लम्बे लम्बे, केस मईया, खोले खड़ी है ॥
ओ सिर पे, सोने का मुकुट, सजाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
फूलों के, हार मेरी, मईया न पहने ॥
ओ नर, मुंडो की, माला मैं, पहनाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
लाल लाल, चूड़ा मेरी, मईया ना पहने ॥
ओ उनके, हाथों में खप्पर, सजाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
लाल पीली, चुनरी मईया, ओढ़ती नहीं है ॥
ओ काली काली, चुनरी मैं, लाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
गंगा का, जल मेरी, मईया ना पीवे ॥
ओ मदिरा, का भोग, लगाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
हलवा, और पूरी मेरी, मईया ना खाए ॥
ओ बकरे, का भोग, लगाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
भोले के, ऊपर मेरी, मईया खड़ी है ॥
ओ उनके, पैरों में पायल, पहनाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
आस पास, मईया मेरे, रहती नहीं है ॥
ओ दूर, कलकत्ता मैं, जाऊँ कैसे ॥
मेरी, रूठ गई, कालका, मनाऊँ...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल