बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे,

तारज नगरी नगरी द्वारे द्वारे

बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे,
बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे।
क्यों इतना तड़पावे बाबा, किस जनम की सजा सुना डाली,
बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे।

तेरे दर पे आस लगाई, तू ही मेरा सहारा है,
दुनिया ने जब साथ है छोड़ा, तूने ही तो संभाला है।
फिर क्यों मेरी राहों में बाबा, इतने काँटे डाल दिए,
क्यों इतना तड़पावे बाबा, किस जनम की सजा सुना डाली।
बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे।

तेरे नाम की ज्योत जलाई, तेरी ही माला फेरूँ मैं,
दर्द मिले या सुख की घड़ियाँ, तेरा नाम ही ले लूँ मैं।
गर कोई भूल हुई हो बाबा, मुझको माफ करना जी,
क्यों इतना तड़पावे बाबा, किस जनम की सजा सुना डाली।
बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे।

दरबार तुम्हारा छोड़ूँ कैसे, तुम ही मेरे रखवाले,
हारे का तू श्याम सहारा, तू ही जग में प्यारा है।
विकास खड़ा है द्वार तुम्हारे, आँखों में दरिया भर डाले,
क्यों इतना तड़पावे बाबा, किस जनम की सजा सुना डाली।

बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे,
बाबा अब तो बात बता दे, क्या गलती हो गई मुझसे॥