(तर्ज – मनिहारी का भेष बनाया )
आया आया है सावन है आया
सुंदर कावड़ ये मैंने बनाया
कावड़ लेके पहुंचे जब उनके दरबार
बैठे सामने भोले हुए दिलदार
मुझे देख बाबा मुस्कुराया
सुंदर कावड़ ये मैंने बनाया ...
वो कैलाशपति भक्तों के साथ-साथ
बाबा आकर थाम लो मेरा ये हाथ
उनका श्रृंगार मन को है भाया
सुंदर कावड़ ये मैंने बनाया ...
डम - डम की ये तो आवाज गूंजी
भोले बाबा की जय कार लगा ऊंची
लक्की दास शरण में है आया
सुंदर कावड़ ये मैंने बनाया ...