तूफानों में कश्ती

तर्ज रो रोकर फ़रियाद करा...

तूफानों ने जब जब घेरा,
पार करी मेरी कश्ती है
इतनी कृपा मुझ पे तेरी,
जिसको दुनिया तरसती है

जब भी हारो श्याम पुकारो
श्याम ही पार लगाता है
ख़ुद पे भरोसा करने वाला
डूब किनारे जाता है
सौंप दी नैया श्याम को जिसने
पार भँवर से लगती है

छोड़ दे चिंता श्याम प्रभु पे
पल पल धीर गवाये क्यूँ
सच्चे मन से इनको बुलाले
जग से आस लगाएं क्यूँ
दर पे इनके सिर को झुका ले,
बिगड़ी यहाँ ही बनती है

मन को बना के श्याम का साथी
श्याम नाम गुण गाया कर
चोट लगे जो दिल पे तेरे,
श्याम को ही बतलाया कर
अनुज श्याम पे नाज़ बड़ा है
जिसने बचाई हस्ती है
तूफानों ने जब जब घेरा,
पार करी मेरी कश्ती है
इतनी कृपा मुझ पे तेरी,
जिसको दुनिया तरसती है