प्रभु थाम लो अब ये हाथ मेरा

मैने हाथ बढ़ाया तेरी तरफ

मैने हाथ बढ़ाया, तेरी तरफ, प्रभु थाम लो अब ये हाथ मेरा
आसान डगर हो जायेगी, जो मिल जायेगा साथ तेरा
मैने हाथ........

कहने को यहां सब अपने,पर अपना कोई ना आए नज़र
मैं छोड़ के ये दुनिया दारी , खाटू वाले आई तेरे दर
इस झूठी दुनिया में केवल, एक तू ही तो है नाथ मेरा
मैने हाथ........

एक आस लगा कर आई हूं, विश्वास मेरा ये जीतेगा
मेरे जीवन की बगिया को, खुशियों से तू ही सींचेगा
मेरे खाटू वाले, श्याम धनी, तू ही तो है आराध्य मेरा
मैने हाथ......

होती जब भी तकलीफ कोई,तुम्हे दिल की बात बताता हूं
कहता कुंदन तुझ बिन बाबा, मैं खुद को अकेला पाता हूं
मेरा आखिर तू ही है बाबा, तू ही तो है शुरुआत मेरा
मैने हाथ.......

स्वर, सोनल शुक्ला लखनऊ
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कुंदन अकेला