जो भी, तुम्हें देखे, वो तेरा, हो जाए
मेरे मन मोहन, वो तुझमें खो जाए।
जो भी तुम्हे देखे, वो तेरा हो जाए॥
गोलमोल चन्दा सा,
मुखड़ा तेरा प्यारा-2
मोर मुकुट सिर का,
सारे जग से न्यारा-2
तेरे दो नैना मेरे दिल पर जादू चलाए ॥
जो भी तुम्हे देखे...
गलपुष्पन माला ,
मोतीयन लड़ न्यारी-2
मुरली अधरन पर,
लट कारी कारी-2
मुरली की धुन तो, हम सबके मन को लुभाऐ ॥
जो भी तुम्हे देखे...
मन मेरा कहता है ,
छवि जी भर कर देखूं -2
नैनों के प्याले से ,
तुम्हे भीतर में ले लूं-2
भीतर मन मेरा अब झूमें और गाएँ ॥
जो भी तुम्हे देखे...
मैं मोहन तेरा ,
अब तू ही है मेरा-2
छोड़ के बन्धन सब,
डाला अब डेरा-2
कृपा यह करना ,तेरी भक्ति में रम जाऐं ॥
जो भी तुम्हे देखे...
सबकी तुम सुनते ,
हम सबकी भी सुनना-2
चरणों में रख लेना,
बस इतना ही कहना-2
संकीर्तन मण्डल बस तेरा गुण गाऐं ॥
जो भी तुम्हे देखे...
भाव रचनाकार
मोहन काबरा मन
श्री राधासर्वेश्वर संकीर्तन मंडल, किशनगढ़