मोहें कान्हा बहुत सतावे सखी री

मोहें कान्हा बहुत सतावे सखी री,

पनिया भरन जब घर से निकलूं,
मुरली तान सुनावे सखी री,
मोहें कान्हा बहुत सतावे सखी री......

जादू भरे हैं कान्हा की अंखिया,
नैनन बाण चलावे सखी री,
मोहें कान्हा बहुत सतावे सखी री.......

पास बुलावे मोरा मन भरमावे,
बतिया बहुत बनावे सखी री,
मोहें कान्हा बहुत सतावे सखी री......

नाच नचावे  मोसे रास रचावे,
मोहें समझ कछु नहीं आवे सखी री,
मोहें कान्हा बहुत सतावे सखी री.......

रचना: ज्योति नारायण पाठक
वाराणसी

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