मेरे मन मधुबन में आ
धुनः सारी रात तेरा तकनीं आं राह
मेरे मन मधुबन में आ, वृंदावन रैंहन वालेया।
मिठी मुरली दी तान सुना, वृंदावन रैंहन वालेया ।।
तक तक राह तेरा नैन भये बांवरे, नैंन भये बांवरे।
बोलो रे बालो कब आवोगे सांवरे, आवोगे सांवरे ।।
इन नैनों की प्यास बुझा - वृंदावन रहन वालेया.
फागुण बसंत होरी सावन बिताये हैं, सावन बिताये हैं।
तेरे देखने को कई सपने सजाये हैं, सपने सजाये हैं।।
बैठी कब से मैं आस लगा - वृंदावन रैंहन वालेया.
प्रेम का तू सिंधु, अनूठी रसधार है, अनूठी रसधार है।
रसपान को 'मधुप, जीया बेकरार है, जीया बेकरार है।।
मुझे रस की वो बूंद पिला - वृंदावन रैंहन वालेया.