श्रृंगार आधुनिक है, दरबार है पुराना श्रृंगार आधुनिक है, दरबार है पुराना

श्रृंगार आधुनिक है, दरबार है पुराना
श्रृंगार आधुनिक है, दरबार है पुराना
प्रेमी नए-नए हैं, सरकार है पुराना
श्रृंगार आधुनिक है, दरबार है पुराना

अज्ञान से भरा हूँ, फिर भी मैं लिख रहा हूँ
इनकी दया से, ज्ञानी दुनिया को दिख रहा हूँ
सच है लेखक नया-नया है
पर भाव है पुराना
श्रृंगार आधुनिक है, दरबार है पुराना

हम भूल गए रे हर बात, मगर तेरा प्यार नहीं भूले
क्या-क्या हुआ दिल के साथ, मगर तेरा प्यार नहीं भूले
तू ही मेरा सच्चा साथी, तू ही एक सहारा है

सारे जग की ठोकर खाकर, पाया साथ तुम्हारा है
भूलूं ना, भूलूं ना, मैं कभी नाम तुम्हारा है
दास हूँ तेरे चरणों का
ओ कान्हा, कान्हा

जब भी रोऊं, दिल को खोऊं, सुध मेरी तुम ले लेना
साथ मेरा तुम थामे हुए हो, हाथ मेरा तुम थामे हुए हो
इतना इशारा दे देना
भूलूं ना, भूलूं ना, मैं कभी नाम तुम्हारा है
दास हूँ तेरे चरणों का...