हंसराज जी महाजन
करो हिफाजत कौम की (कविता)
छोड़ बनावट छोड़ दिखावट, करो सजावट कौम की।
प्यार मुहब्बत और वफा से, करो इबादत कौम की ।।
जग में आज महाजन जाति, का बड़ा ही नाम है।
दुनियां के कोणां कोणां में, फैला कौम का नाम है ।।
बरकरार रखनी सदा ही, शहिनशाहत कौम की - प्यार ०
छोटी छोटी बातों को तुम, मसला बनाना छोड़ दो ।
बेमतलब की कल्म जुबां से, तीर चलाना छोड़ दो ।।
सुलझालौ हर उलझन मिलकर, लगी अदालत कौम की - प्यार ०
राग द्वेष का कोहड़ कहीं, अपंग हमें न कर डाले।
कुर्सी का यह जंग कहीं, अधरंग हमें न कर डाले ।।
राष्ट्र देश समाज की सेवा, करो सदा तुम शौक से - प्यार ०
बुरी कुरीति और बुराई, झूठी शोहरत छोड़ दो।
बनकर निष्ठावान व्यक्ति, नाता कौम से जोड़ दो ।।
निज आत्म मन्थन कर निशदिन, करो हिफाजत कौम की - प्यार ०
मानसरोवर का हंस, मोति बिखराकर चला गया।
भगती ज्ञान कर्म योग का, पाठ पढ़ाकर चला गया ।।
अब तुम्हारे ही हवाले, है अमानत कौम की-प्यार०
जाति हित में श्रद्धा भगती, प्रेम प्यार और भाव से ।
आवो मिल उत्सव मनावो, मन लगन और चाव से ।।
प्रण ले आज 'मधुप' कर डालो, पुख्ता इमारत कौम की - प्यार ०