साँवरिया तुमसा नहीं इस अम्बर के निचे

साँवरिया तुमसा नहीं इस अम्बर के निचे,
इसी लिए तो डोल रही है दुनिया पीछे पीछे,

पाके तुझे लगता मुझे कोई मिला है अपना,
कभी कभी तो लगता है देख रहा हु सपना,
हर पल तेरी छवि निहारु आँखों को मैं मीचे मीचे,
साँवरिया तुमसा नहीं इस अम्बर के निचे...

धरती की सब उपमा तेरे आगे फीकी लगती,
स्वर्ग भी फीका लागे जब खाटू की नगरी सजती,
दर्शन तेरे करने बाबा आते है सब खींचे खींचे,
साँवरिया तुमसा नहीं इस अम्बर के निचे..

श्याम रंगीला बड़ा शबीला दिल में वस् गया मेरे,
श्याम कहे जन्मो जन्म तक हो गये हम तो तेरे,
भूल न जाना मुझको नहीं तो मर जाऊ गा जीते जीते,
साँवरिया तुमसा नहीं इस अम्बर के निचे

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