साई तेरी शिरडी मुझे रोज भुलाती है

साई तेरी शिरडी मुझे रोज भुलाती है,
मुझे रोज भुलाती है तेरा दर्श कराती है,

जब शिरडी आता हु इस का हो जाता हु,
जब घर को जाता हु सपनो में आती है,
साई तेरी शिरडी मुझे रोज भुलाती है,

जब चावड़ी आता हु तुम्हे भजन सुनाता हु,
तुम्हे भजन सुनाने से मुझे शक्ति आती है,
साई तेरी शिरडी मुझे रोज भुलाती है,

तेरी द्वारका माई जी कितनी मन भावन है,
याहा जलती हुई धुनि सारे कष्ट मिटा ती है,
साई तेरी शिरडी मुझे रोज भुलाती है,

तेरे समाधि मंदिर का अब क्या मैं भाखन करू,
तेरी बोली मूरत तो ममता बरसाती है,
साई तेरी शिरडी मुझे रोज भुलाती है,

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