किसी ने ना जाना किसी ने ना जाना

किसी ने ना जाना किसी ने ना जाना,
भेद मेरे साई जी का किसी ने न जाना,

कौन है क्या है साई जी सोच के है दुनिया हैरान,
साई की हस्ती है कैसी दुनिया है इस से अनजान,
जाहिर है साई का तो भेश फकीराना,
वैसे अकार देखो उनका ठाठ है शहाणा,
किसी ने ना जाना किसी ने ना जाना,

कभी क्यों कहते है अल्ल्हा हु अकबर कभी क्यों साई रट ते हर हर,
कभी क्यों सजदे में सिर झुकाते कभी क्यों साई घंटा भजाते,
मुश्किल है भक्तो ऐसी गुथी को सुलझाना,
भक्ति के इस भेद से अनजान है ज़माना,
किसी ने ना जाना किसी ने ना जाना,

कितने ही उन्होने करिश्मे साई के हाथो जो हुये,
जल से कैसे दीप जले  कोई न बत ला पाये,
मुश्किल है इस राज से परदे को हटाना,
मुन्किल नहीं सबको ये करिश्मा दिखलाना,
किसी ने ना जाना किसी ने ना जाना,

राज को राज ही रहने दीजिये और किसी से कुछ मत कहिये,
साई क्या है साई जाने उसको तो बस रब पहचाने,
भेद ये कठिन है समझना और समजाना,
संभव नहीं रुतबा साई जी का बतलाना,
किसी ने ना जाना किसी ने ना जाना,

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