बाजी रे बांसुरिया श्याम यमुना के तीर

बाजी रे बांसुरिया स्याम जमुना के तीर
बंसी मधुवन में बाजी,
काम छोड़ सारी सखियां भागी
धुन सुन के मै हो गई राजी नैना बहे नीर

बंसी की धुन परी  कानन में
चमक उठी मोरे आंगन में
भाग चली घर से मधुवन में धरे नहीं धीर

बंशी बाज चली बेखटकी
छोड़ चली मैं सिर की मटकी
भूल गई मै सुध औघट की उड़ चल्यो चीर

सीताराम कृस्न गुण गावे
सारी सखियां धुन सुन आवें
मधुर मधुर मोहन मुसकावे मिटे भव पीर
द्वारा योगेश तिवारी

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