हरि भगतो का है बृज़ में ठिकाना

हरि भगतो का है बृज़ में ठिकाना,
शाम पागलो का वृन्दावन पागल ख़ांना,
हरि भगतो का है....

बृज में रहकर भजंन करेंगें,
सन्तों की झुठन खा जीवन जीयेंगें,
सेवा कुन्जं निद्धिवंन रोज रोज जाना,
हरि भगतो का है....

मथुरा में श्याम जनंम लियो है,
गोकुल में सब लीला कियो है,
श्यामा शाम मिलते यहां प्रेमियों ने मांना,
हरि भगतो का है....

चरणों में गुरूवर के सदा ही रहेंगे,
उनकीं कृपा से बांकें दर्शंन करेंगें,
चित्र विचित्र का बस यही कहना,
हरि भगतो का है....

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