दुनिया में गर कहीं, हारों की कदर है
सांवरे का दर है वो , सांवरे का दर है॥
जीतते के साथी, है दुनिया वाले
अच्छे समय में किसी को, कोई भी निभा ले
गिरते को केवल,श्याम ही संभाले
किस्मत का लेखा बदले ,जहां मैं किधर है॥
सांवरे का दर है वो, सांवरे का दर हैं
लाखों में हारे को, पहचान लेता
किसी न किसी तरह दर, बुला ही ये लेता
बिन बोले बिगड़ी, बना ही ये देता
प्रेम बिना स्वार्थ के, मिलता किधर है॥
सांवरे का दर है वो, सांवरे दर हैं
हार गया है तो, खुशियां मना तु।
आज से अभी से, श्याम का हुआ तू,
कमल श्याम जो कर सकता, ना जनता तू,
हारे हुए को मिलता, सहारा किधर है,
सांवरे का दर है वो, सांवरे का दर है॥