छुपे हुए हो तुम कहां

छुपे हुए हो तुम कहाँ,नहीं कोई अता पता
मैं ढुंढता हुं सांवरें,कहां मिलोगे ये बता
छुपे हुए हो तुम कहां...

पुकारता रहा तुझे,दुआ सुनोगे कब मेरी
ज़रा सा ये बता मुझे,दया मिलेगी कब तेरी
कहीं मैं आज रो पड़ू,ना और अब मुझे सता
मैं ढुंढता हुं सांवरें,कहां मिलोगे ये बता
छुपे हुए हो तुम कहाँ...

ये तेरे मेरे बीच की,मिटेगीं कैसे दुरियां
ना जानें ये जुदाई की,कटेगीं कैसे बेड़ियां
ये फासले बनें हैं क्यों,तूं आके अब इन्हें मिटा
मैं ढुंढता हुं सांवरें,कहां मिलोगे ये बता
छुपे हुए हो तुम कहाँ...

जिया में मेरे जल रही,दीदार की ये आग है
ज़ुबां ये मेरी गा रही,विरह के सुनें राग है
ये हर्ष घुट रहा तेरा,तूं आके आग दे बुझा
मैं ढुंढता हुं सांवरें,कहां मिलोगे ये बता
छुपे हुए हो तुम कहाँ,नहीं कोई अता पता
मैं ढुंढता हुं सांवरें,कहां मिलोगे ये बता
छुपे हुए हो तुम कहां...

बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000

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