दिवानों की महफिल है...दिवानें ही आते है...
खाटु में ग्यारस की...हाजरी लगाते है...
घर से निकलते है... सांवरे से मिलने को...
खाटु पहूँचते ही...सिधे दर्शन को जाते है...
भुख इन्हे भजनों की...प्यास दर्शन की रहे...
श्याम के झलक पाकर...भुख प्यास मिट जाते है...
श्रिंगार प्यारा है...मन को लुभाता है...
बांकी अदाओं पे...दिल हार जाते है...
बाबा से कहेंगे दिल की...आते है यही सोचकर...
पग चौखट पे रखते ही...सब कुछ भुल जाते है...
श्याम के दिवानों का...कही और ना ठिकाना है...
पुछो ज़रा इनसे...सभी खाटु बताते है...