काहे ना इतराउ मैं मुझे खाटू मिला है...॥२॥
खाटू मिला है ,सांवरिया मिला है॥२॥
काहे ना इतराउ मैं मुझे खाटू मिला है...॥
हारे का सहारा तुझे कहती है दुनिया...॥२॥
करता न भेद-भाव, चाहे रंक हो या बनिया...॥२॥
शीश तेरे दर झुकाऊं मै मुझे खाटू मिला है।
काहे ना इतराउ मैं मुझे खाटू मिला है...॥
कलयुग में तुमसा ना देव कोई दूजा...॥२॥
घर-घर होती है, श्याम तेरी पूजा...॥२॥
जयकारा तेरा लगाऊँ मै मुझे खाटू मिला है।
काहे ना इतराउ मैं मुझे खाटू मिला है...॥
शंकर की विनती है, सुन ले कन्हैया...॥२॥
पार तू कर दे नाव बनके खिवैया...॥२॥
लायक तेरे बन जाऊँ मैं, मुझे खाटू मिला है।
काहे ना इतराउ मैं मुझे खाटू मिला है...॥
गायक: शंकर यादव(7982956590)
लिरिक्स: शंकर यादव
संगीत: कुमार वैभव JDS