तेरे कारण मै बैरागन...

॥दोहा॥
सावरी सूरत मोहन की,बस गई मेरे मन।
तड़पू ऐसे मिलन को जैसे जल बिन तड़पे मीन॥

तेरे कारण मै बैरागन,संग मेरा मत छोड़ना।
मन मीत मेरे मोहना,मन मीत मेरे श्याम।
तेरे कारण मै बैरागन...

तेरे चरणों की मै दासी।
तेरे दरस की प्रेम पियासी॥
तू ही मेरा काबा काशी॥।
∆दिल से दिल को जोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना...

तू ही मेरा सांझ सबेरा।
प्रेम पुराना तेरा मेरा॥
हमको तेरे बिरहा ने घेरा॥।
∆आस अब मत तोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना...

ओ मेरा मन हरने वाले।
मुझे दीवाना करने वाले॥
है तो तेरे नैन निराले॥।
∆हाथ अब मत छोड़ना,
मन मीत मेरे मोहना...
तेरे कारण मै बैरागन,संग मेरा मत छोड़ना।
मन मीत मेरे मोहना,मन मीत मेरे श्याम॥


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