मैं हु दासी तेरी दातिए

मैं हु दासी तेरी दातिए,
सुनले विनती मेरी दातिए,

मैया जब तक जियु मैं सुहागन राहु,
मुझको इतना तू वर्धन दे,

मेरा प्राणो से प्यारा पति,
मुझे से विछड़े न रूठे कभी,
माता रानी से मेरी आयु लगे ये मनोकामना है मेरी,
माँ तेरे लाल की मैं हु अर्धागनी,
मैं हु दासी तेरी दातिए...

मैया तू ही मेरी आस है मेरा तुझपे ही विशवाश है,
आसरा है तेरा मुझपे करना दया मेरी तुझसे ये अरदास है,
बिन तेरे प्यार के क्या मेरे पास है,
मैं हु दासी तेरी दातिए,

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