सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है

सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,
माता रतनो तेरी तुझको तुझे घर पे भुलाती है,
सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

ख्याबो में आकर तुम मुझे दर्श दिखते हो,
जब हाथ लगाती हु,
मेरी आँख खुल जाती है,
सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

इल्जाम लगाये जो तेरे ऊपर सिद्ध जोगी,
सब की बातो में मैं आकर तेरी माँ पश्ताती है,
सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

करन खन्ना ये लिखता है सिद्ध जोगी पौणाहारी,
बाते सुन कर माँ रत्नो की मेरी आंख भर आती है,
सिद्ध जोगी पौणाहारी तेरी याद सताती है,

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