भोले शँकर की दुल्हनिया जग की पालनहारी

भोले शँकर की दुल्हनिया

भोले, शँकर की, दुल्हनिया, जग की पालनहारी ॥
हो जग की, पालनहारी मईया, तीन लोक से न्यारी ॥
भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

ब्रह्माण्ड, देवों से भरा पर, माँ को, कोई न भाया ।
जंगल के, वासी शिव जी पर, मईया का, दिल आया ॥
हो पलट के, रख दी, फिर दोनों ने ॥तीन लोक की काया,
तीनों, लोक हुए आभारी, जग की पालनहारी,
भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

जब संकट, आया देवों पे, माँ ने, उसे संभाला ।
देवों पे, आए संकट को, जग जननी ने टाला ॥
हो एक एक, दानव भूतल से ॥माँ ने, खोज़ निकला,
माँ फिर, असुरों को संहारी, जग की पालनहारी,
भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

शुम्भ निशुम्भ और, रक्त बीज़ को, माँ ने, मार गिराए ।
चण्ड मुण्ड, मधु कैटभ माँ के, क्रोध से, बच न पाए ॥
हो अंत हुआ जब, महिषासुर का ॥सभी देव हर्षाए,
हर्षित, हुए डमरु धारी, जग की पालनहारी,
भोले, शँकर की, दुल्हनिया...

सारे जग की, माँ कहलाती, हो शिव जी की नारी ।
ध्यान किया, जिसने माँ तेरा, दूर हुई लाचारी ॥
हो लाज़ रखो माँ, किशन भगत की ॥आया शरण तुम्हारी,
मन की, दूर हो, सब लाचारी, जग की पालनहारी,
भोले, शँकर की, दुल्हनिया...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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