कैसा हो गर मंदिर तेरा

सुनले बाबा बात मेरी कानो में तेरे पड़ जाये,
कैसा हो गर मंदिर तेरा और थोरा सा बड जाये ॥

श्याम प्रभु तेरे प्रेमियों का करते हम सम्मान है,
पर विस्तार हो मंदिर का ये हम सबका अरमान है,
एसे हो दर्शन के हर प्रेमी खुश हो कर के जाए,
कैसा हो गर मंदिर तेरा ...........

तू भी देख सके हमको और हम भी तुझको देख सके,
इतना बड़ा हो मंद की हम झुक के माथा टेक सके,
ले फटकारा मोरछड़ी का बात हमारी बन जाए,
कैसा हो गर मंदिर तेरा .............

आओ मिलकर कदम बडाये ले जैकारा श्याम का,
राज जो इतना कर ना सके तो प्रेमी किस काम का,
क्या कुछ ना हो सकता अगर प्रेमी जीद पे अड़ जाए,
कैसा हो गर मंदिर तेरा .............

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