धुना अज्ज वी धुखदा ए

धुना अज्ज वी धुखदा ए,
जीथे नाथ ने अलख जगाई,
मेरे बाबा जी ने अलख जगाई,
पोनाहारी जी ने अलख जगाई,
जीथे मेले लगदे ने,
ओह पिंड है शाहतलाई,
धुना अज्ज वी धुखदा ए,
जीथे नाथ ने अलख जगाई......

तन ते भस्म रमा जोगी,
बनखंडी विच तुरिया जांदा ए,
हथ विच चिमटा फड़ के जोगी,
गीत शिवा दे गाउंदा ए,
ओस घर विच जा वडेया,
जीथे रेहदी रत्नों माई,
धुना अज्ज वी धुखदा ए,
जीथे नाथ ने अलख जगाई......

रत्नों रोटी लेके जांदी,
जोगी हाथ ना लौंदा सी,
ओह पोना दे नाल की गुजारे,
पोनाहार  कहोंदा सी,
चिमटा मार के जोगी ने,
रोटी लस्सी कड विखायी,
धुना अज्ज वी धुखदा ए,
जीथे नाथ ने अलख जगाई......

किरपा जोगी दी जिस ते होजे,
उसदी किस्मत खिल जांदी,
मूसपुरिया लग के नाथ से चरनी,
सब नू मंजिल मिल जांदी,
प्रदीप दीवाना सिद्ध जोगी दा,
जिसने कलम चलाई,
धुना अज्ज वी धुखदा ए,
जीथे नाथ ने अलख जगाई......
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